मोमबत्ती की आग को हाथ कैसे उठाते है जादुगर ?Part 41

17-Jan-2018

     बचपन में जादू का खेल देखना सबको अच्छा लगता है. जादूगर अपने हाथ की सफ़ाई से कुछ चीज़ों को ग़ायब कर देता है. तो कभी रूमाल से कबूतर बना देता है और कभी, इंसान की गर्दन ही अलग कर देता है.
जब भी हम जादूगर को कोई जादू करते देखते हैं तो यही सवाल मन में उठता है कि कैसे वह यह सब कर लेता है। कैसे एक खाली बॉक्स से कोई चीज निकाल देता है? कैसे एक बंद बोतल के अंदर कोई चीज पहुंचा देता है?
ये अजब करिश्मे देख कर बच्चे तो हैरान होते ही हैं, कई बार बड़े भी इसे सच मान लेते हैं और इसे एक कला के तौर पर देखते हैं. लेकिन सवाल उठता है कि क्या जादू जैसी कोई चीज़ होती है? या नहीं?

     मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि हमारा दिमाग़ एक खास तरीक़े से काम करता है. हमारा दिमाग़ जिस चीज़ के बारे में सोचता है उसके मुताबिक़ ही हमारी आंखों का रेटीना दिमाग में उसकी तस्वीर उकेर देता है.
यही वजह है कि कभी कभी हमारा दिमाग़ अंधेरे में भी कुछ तस्वीरें बना लेता है. ऐसा वहां ज़्यादा होता है, जिस जगह से हम वाकिफ़ होते हैं. जहां हमें ये पता होता है कि यहां क्या क्या सामान रखा है.

लेकिन जिस जगह से हम ना वाकिफ़ होते हैं जहां ये पता ही नहीं होता कि वहां कौन हो सकता है? क्या सामान हो सकता है? तो ऐसे में दिमाग़ किसी किसी चीज़ को छूते हुए कोई तस्वीर बनाता है. कई बार ये तस्वीर एकदम साफ़ होती है. तो, कई बार कोई तस्वीर बन ही नहीं पाती.
    कहने का मतलब ये हुआ कि हम जो सोचते हैं और जो देखना चाहते हैं, हमारा दिमाग़ उसी दिशा में काम करता है.
यानी जादू जैसी कोई चीज़ नहीं होती. हमारा दिमाग़ तो बस किसी के हाथ की सफ़ाई का शिकार हो जाता है.
तो हम आपको एक एक जादू का रहस्य दिखाएंगे है। आप भी सीख सकते है और सबको दिखा सकते है। मोमबत्ती की आग को हाथ कैसे उठाते है जादुगर ?

आप भी देखिए यह मजेदार विडियो: 

 

  

 

Please reload

Recent Posts
Please reload

Archive
Please reload

Follow Us
  • download
  • Amazon Social Icon
  • Instagram Social Icon
  • Blogger Social Icon
  • YouTube Social  Icon